:: ll साँई लीला- अनुभव ll ::


Dr.Gaurav ji ke kalam se (Sai aashiyana ke mukhya admin) 
यह मेरा अनुभव है जो हाल ही में शिर्डी में द्वारकामाई में 30 जुलाई को मेरे साथ हुआ, वक्त था- सुबह के 4.20 बजे….

मैं नहा धोकर द्वारकामाई बाबा की काकड़ आरती में उपस्थित होने गया था और उसी दिन की मेरी शिर्डी से घर वापसी थी.


मैं द्वारकामाई में जाकर आगे जाकर बैठ गया , तब ॐ जय जगदीश आरती चल रही थी तब अचानक मुझे खुद पर किसी का चलना महसूस हुआ , मैंने खुद को देखा तो पाया कि- एक छोटा सा कुत्ता (कुत्ते का एक छोटा बच्चा) , मेरी गोद में चढ़ रहा था, मैंने उसे रोका नही, वो मेरी गोद में चुपचाप बैठ गया और जब तक ॐ जय जगदीश आरती खत्म नही हुई वो बैठा रहा ….
( आप लोगो को ज्ञात होगा कि बाबा को सब जीव प्रिय थे और बाबा के समय कुत्ते बाबा के साथ उनके साथ भोजन करते थे तब भी बाबा को आपत्ति नही होती थी एवम बाबा भी उन्हें बेहद प्रेम करते थे )

आरती खत्म होने के बाद वो कुत्ते का प्यारा सा बच्चा मेरी गोद से उतरा और एक सज्जन के पास जाकर खड़ा हो गया, उन सज्जन ने उस कुत्ते को दुत्कारा तो कुत्ता वहां से चला गया और वहां उपस्थित सभी लोगो को देखता हुआ वो वहां से चला गया, तब मुझे पीड़ा हुई और मैं मन में सोचने लगा कि उस बच्चे को प्यार से गोद में बैठना है तो पुनः मेरे पास आ जाये ।

कुछ क्षण पश्चात जब काकड़ आरती आरम्भ हो गयी थी एवम कुछ ही मिनट हुए थे कि मैंने देखा कि वही बच्चा सब जगह घूमता हुआ वापिस मेरे सामने आ गया और मेरी गोद में फिर से आकर बैठ गया और पूरे अधिकार से मेरी गोद में आकर बैठा जैसे कि मैं उसका अपना हूँ और उसे जैसे लगा कि यहां दुत्कार नही प्यार मिलेगा ।

और मैंने उस पर बड़े प्यार से हाथ फेरा तो वो आँखे बंद करके मेरी गोद में ही सो गया ।
( दरअसल मुझे कुत्ते पसन्द नही आते और मुझे उनसे बहुत डर लगता है पर उस दिन मुझे न जाने क्या हुआ , न तो मैंने उसे दुत्कारा और न ही डरा अपितु उसे प्यार करते हुए अपनी गोद में सोने दिया )

वो बच्चा मेरी गोद में तब तक सोता रहा जब तक कि आरती खत्म नही हो गयी और आरती बाद सब लोग उठ गए तब भी वो मेरी गोद में लेटा रहा, फिर मेरे साथ मेरे एक मित्र व् मैंने उस बच्चे पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा कि – ” बाबा अब उठो, देखो आरती भी खत्म हो गयी है , “

तब उस बच्चे ने आँखे खोली तो पाया कि उसकी आँखों में पानी आ गया था , मैंने तब उसे बोला कि – ” बाबा देखो उठो, मुझे गुरू स्थान भी जाना है आपके मंगल स्नान के जल लेने के लिये लाइन में लगने के लिए और जल शायद ना मिल पाए क्योकि लाइन लंबी होगी “

तब आँखों में आँसू लिए वो बच्चा उठा तब हमें अहसास हुआ कि शायद ये बाबा ही हो और इस कुत्ते के रूप में आये हो और आज शिर्डी से वापिस घर जाना है तो बाबा उदास हो गए हो कि मैं आज शिर्डी से चला जाऊंगा इसलिये उनकी आँखों में पानी आ गया हो ।

ये बाबा की लीला मुझे आश्चर्य से भर दी और तब जाकर मैं बाबा का मंगल स्नान जल लेने के लिए कतार में लगा तो जल भी मिल गया और एक और लीला , बाबा ने तब मङ्गल स्नान बाद श्रृंगार पश्चात पीत रंग के वस्त्र पहने तो मेरी आँखें अश्रुओं से भर गई क्योकि मुझे बाबा को पीत रंग के वस्त्रों में देखना बहुत पसंद है , तब मुझे यकीन हो गया कि कुछ देर पहले द्वारकामाई में वो कुत्ते का छोटा बच्चा पूरी आरती मेरी गोद में लेटा रहा वो मात्र एक संयोग नही था, बल्कि उस बच्चे के रूप में बाबा खुद मुझसे साक्षात्कार करने आये थे ।
बाबा साँई बहुत दयालु है एवम उनकी लीलाओ का कोई अंत नही है अतः आप साँई में पूर्ण श्रद्धा रखते हुए सब्र बनाये रखे….क्या पता किस क्षण आपका साँई से साक्षात्कार हो जाये ???
बाबा साँई की लीला…बाबा साँई ही जाने ।

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